दीपाली की चुदाई

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प्रेषक : विजय …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम विजय है और में दिल्ली में अकेला ही रहता हूँ, मेरी उम्र 24 साल है और में दिखने में बहुत अच्छा सुंदर हूँ, लेकिन मेरी लम्बाई 5.10 इंच होने की वजह से में मोटा नहीं लगता हूँ, मैंने अभी तक शादी नहीं की है। दोस्तों वैसे भी में उत्तरप्रदेश के एक बहुत ही बड़े जमीदार परिवार से सम्बंध रखता हूँ और आप सभी कि तरह में भी कामुकता डॉट कॉम का नियमित पाठक हूँ और में सभी कहानियों को बड़े ध्यान से पढ़ता हूँ, मुझे सभी कहानियाँ बहुत अच्छी लगती है। दोस्तों में बड़ा ही रसिक मिज़ाज का हूँ, में 18-19 साल की आयु से ही चुदाई का मज़ा ले रहा हूँ और अब तक में 50 से ज़्यादा लड़कियों की चुदाई कर चुका हूँ और वो कहानी भी में आप सभी को अवश्य सुनाऊँगा और आज में आपको अपनी पहली चुदाई की कहानी सुना रहा हूँ। दोस्तों यह बात उन दिनों की है जब में 12वीं क्लास में पढ़ता था, तब हमारे पड़ोस में एक पंजाबी परिवार रहता था और उस परिवार में सिर्फ तीन ही लोग रहते थे, एक 70 वर्षीय बुजुर्ग, एक लड़का और एक लड़की। दोस्तों उस लड़के की उम्र करीब 24-25 साल होगी और लड़की की उम्र 20-21 साल की होगी और वो बुजुर्ग व्यक्ति उन दोनों के पिता थे और वो अक्सर बीमार ही रहते थे, जबकि उन दोनों की माँ की मौत पहले ही हो चुकी थी।

दोस्तों वैसे तो उस परिवार में 5-6 लड़कियाँ और भी थी, लेकिन वो सब बहुत उम्र की थी और उन सबकी शादी भी हो चुकी थी। अब वो अपने पति के साथ अपने ससुराल में रहती थी, जो कि कभी-कभी अपने पिताजी को देखने परिवार के साथ 2-3 दिन के लिए आती रहती थी। फिर हमारा भी उस पंजाबी परिवार में बहुत आना जाना था, उस लड़के का नाम राजेश और लड़की का नाम दीपाली था। दोस्तों दीपाली दिखने में बहुत ही सुंदर लगती, में राजेश को भाई साहब और दीपाली को जीजी कहता था और दीपाली का बदन मानो भगवान ने बहुत फुर्सत से साँचे में ढालकर बनाया हो, उसका वो गोरा रंग, हल्का गुलाबीपन लिए जैसे की दूध में चुटकी भर केसर डाल दी हो, उसके बदन का आकार 36-24-38 था। दोस्तों उसके बूब्स एकदम सख़्त और उभरे हुए थे और उसके कुल्हे भारी थे, देखकर ऐसा लगता था कि उसके कुल्हे की जगह दो गोल बड़ी-बड़ी गेंद हो और वो ज्यादातर सलवार कुर्ता पहनती थी। फिर जब भी वो चलती थी तब देखकर ऐसा लगता था कि दो गेंद आपस में रगड़ खा रही हो और जब वो हंसती थी तो उसके गालों में बड़े प्यारे खड्डे पड़ते थे, जिसकी वजह से वो और भी सुंदर लगने लगती थी।

दोस्तों वो बोलती बहुत थी और इसलिए वो एक मिनट भी चुप नहीं बैठती थी और वैसे उसमे एक खास बात यह थी कि वो किसी की भी चीज में कोई कमी नहीं निकालती थी, चाहे उसको पसंद हो या ना हो, वो हमेशा यही कहती थी कि बहुत ही प्यारी है। फिर यदि उसको कुछ खाने के लिए दो और वो उसको पसंद नहीं आई हो, लेकिन वो तब भी उसकी तारीफ ही करती और कहती कि बहुत ही स्वादिष्ट बनी है और इस बात की हम सभी हमेशा से ही दीपाली की बड़ी तारीफ किया करते थे। दोस्तों हमारी कॉलोनी के सभी लड़के दीपाली के दीवाने थे और वो सभी बस एक उसको चोदना चाहते थे, वैसे में भी अक्सर सोचता था कि काश में दीपाली की चुदाई के मज़े ले लूँ। फिर एक दिन भगवान ने मेरे मन की बात को सुन लिया और मेरे जीवन में बहुत ही जल्दी वो मौका आ ही गया जिसका मुझे बड़ा इंतजार था। दोस्तों वो सितम्बर का महीना चल रहा था और उस दिन रविवार की छुट्टी थी, इसलिए में घर ही था, उस समय सुबह के करीब 11 बज रहे थे। फिर में किसी काम की वजह से अपनी छत पर गया, क्योंकि वैसे भी हमारे दोनों की छत आपस में मिली हुई है और छत से उनके कमरे और बाथरूम तक का हिस्सा बिल्कुल साफ दिखाई देता है।

फिर उस दिन जब में छत पर गया, तब मुझे दीपाली के गाने की आवाज आ रही थी और में वैसे ही उनके घर की तरफ देखने लगा। तभी में वो द्रश्य देखकर एकदम चकित हो गया, क्योंकि मैंने देखा कि उस समय दीपाली बिल्कुल नंगी बाथरूम में पाटे पर बैठी हुई थी और उसने अपने दोनों पैरों को फैला रखा था। दोस्तों में सच कहता हूँ कि में तो घूरकर उसको देखता ही रह गया, दीपाली के बूब्स एकदम गोरे और निप्पल तनी हुई थी और जैसा कि में उसके बारे में विचारों में सोचा करता था, वो तो उससे भी अधिक सुंदर निकली थी। अब उसके गोरे उभरे हुए बूब्स के बीच में हल्के गुलाबी रंग के दो छोटे-छोटे घेरे थे और उनमे बिल्कुल गुलाबी रंग के निप्पल थे, जो कि बाहर की तरफ निकले हुए थे। दोस्तों उसका पूरा शरीर बहुत ही चिकना और गोरा था और उसके पैरों के बीच में तो पूछो ही मत वहाँ उसकी चूत पर काले रेशमी बाल मुझे नजर आ रहे थे और उनके बीच हल्की सी गुलाबी रंग की दरार भी मुझे साफ नजर आ रही थी। दोस्तों उस दरार में ऊपर की तरफ एक छोटा सा चने जैसा दाना चमक रहा था और वो उस समय कपड़े धो रही थी, इसलिए उसका पूरा ध्यान उस तरफ ही था।

अब दीपाली को इस हालत में देखकर मेरा लंड एकदम से तनकर खड़ा हो गया, मानो वो इस हसीन चूत को सलामी दे रहा हो। अब मेरा मन कर रहा था कि में तुरंत ही वहाँ पहुँच जाऊं और दीपाली को कसकर अपनी बाहों में जकड़कर उसकी मस्त चुदाई के मज़े लूँ, लेकिन में ऐसा नहीं कर सका। फिर में बहुत देर तक वहाँ पर खड़ा रहा, दीपाली को ऐसे ही देखता रहा और पेंट के ऊपर से ही अपने लंड को पकड़कर सहलाता रहा। अब मेरी हालत बहुत खराब हो रही थी, जिसकी वजह से मेरा गला एकदम सूख गया था और अब में थूक भी ठीक से नहीं निगल पा रहा था। अब मेरे पैर कांप रहे थे और मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरे पैरों में बिल्कुल भी दम नहीं रहा है और में किसी भी समय गिर जाऊँगा। फिर में इस हालत में उसको करीब-करीब 15-20 मिनट तक देखता रहा और वो बार-बार अपना सर नीचे झुकाकर उसके पैरों में अपनी चूत की तरफ देख रही थी और एक कपड़े से अपनी चूत के बालों को रगड़ रही थी, जिससे उसकी चूत के कुछ बाल उतर रहे थे। फिर में तुरंत समझ गया था कि आज दीपाली अपनी चूत के बाल क्रीम लगाकर साफ कर रही है और में उसको बड़े ही गौर से देख रहा था कि तभी अचानक से उसकी नजर मेरे ऊपर पड़ गयी और फिर उसने एकदम से बाथरूम का दरवाजा बंद कर लिया।

अब यह देखकर में बहुत डर गया और छत से नीचे उतर आया। फिर में पूरे दिन इसी उलझन में लगा रहा कि अगर जीजी इस बारे में पूछेगी तो में क्या जवाब दूँगा? लेकिन अब मुझे कुछ सूझ ही नहीं रहा था। फिर मैंने सोचा कि में दो-तीन दिन तक उसको दिखाई ही नहीं दूंगा और उसके बाद मामला कुछ शांत हो जाएगा और फिर तब देखा जाएगा की क्या जवाब देना है? फिर में एक दिन तो दीपाली से बचा ही रहा और उसकी नजरों के सामने ही नहीं आया। फिर अगले दिन पापा और मम्मी को किसी के यहाँ सुबह से शाम तक के लिए जाना था और ड्राइवर आया नहीं था और इसलिए पापा ने मुझसे कहा कि में उनको कार से छोड़ आऊँ और शाम को वापस ले आऊँ। अब में उनको कार से छोड़ने जा रहा था कि मैंने दीपाली को अपनी कार की तरफ तेज़ी के साथ आते हुए देखा। दोस्तों डर की वजह से मेरा हलक सूख गया था और अब मम्मी-पापा कार में बैठ ही चुके थे। फिर मैंने झट से कार को स्टार्ट किया और आगे बढ़ा दिया हालाँकि मम्मी ने देखकर कहा भी कि दीपाली हमारी तरफ ही आ रही है रुको थोड़ा, कहीं उसको कोई जरूरी काम ना हो, लेकिन मैंने अनसुना कर दिया और गाड़ी को तेज़ी के साथ ले गया।

फिर मैंने मन ही मन में सोचा कि जान बची तो लाखो पाए और लौटकर बुद्धू घर को आए। फिर जब में पापा-मम्मी को छोड़कर वापस अपने घर आया, तब मैंने देखा कि वो हमारे घर के दरवाजे के पास ही खड़ी है। फिर जैसे ही मैंने कार रोकी, तब वो भागकर कार के पास आ गयी और वो मुझसे बहुत गुस्से में बोली कि कार को भगाकर ले जाने की कोशिश ना करना वरना बहुत ही बुरा होगा। अब में बहुत बुरी तरह से डर गया था और में हकलाते हुए बोला कि जीजी में कहाँ भागा जा रहा हूँ? और मेरी इतनी हिम्मत ही कहाँ है? जो में आपसे भाग सकूँ? इस पर दीपाली ने कहा कि अभी जब तुने मुझे देखा था, तब तो जल्दी से भाग गया था और अब बातें बना रहा है। फिर मैंने कहा कि जीजी मुझको कार को एक तरफ तो लगाने दो और फिर अंदर बैठकर हम बात करते है। अब वो बोली कि हाँ ठीक है और फिर मैंने कार को एक तरफ लगा दिया और दीपाली के साथ अंदर अपने घर चला गया। फिर मैंने अपने कमरे में जाते ही ऐ.सी. को चालू कर दिया, क्योंकि घबराहट के मारे मुझे बहुत पसीना आ रहा था। फिर में अपने होंठो पर जबरदस्ती हल्की सी मुस्कान लाकर बोला कि आओ जीजी बैठ जाओ और बोलो कि क्या कहना है? और ऐसा कहते हुए में रोने सा हो गया।

अब वो बोली कि डर मत में तुझको मारूँगी या डाटूगी नहीं, बस में तो यह कहने आई हूँ कि तू उस दिन छत से क्या देख रहा था? तब में बिल्कुल अंजान सा बनने लगा और कहा कि जीजी आप कब की बात कर रही है? मुझे तो कुछ ध्यान नहीं है। फिर उन्होंने हल्का सा मुस्कुराकर कहा कि साले बनता है और अभी रविवार को तू सुबह के समय छत से मुझे नंगा नहीं देख रहा था? तब मैंने कोई जवाब नहीं दिया। फिर वो बोली कि क्या किसी जवान लड़की को इस तरह नंगा देखना अच्छा लगता है? तुझे क्या शरम नहीं आती? तब मैंने उसको कहा कि जीजी आप हो ही इतनी सुंदर कि आपको उस दिन नंगा देखा तो में अपनी आंखे नहीं फैर सका और में आपको देखता ही रहा, वैसे में बड़ा ही शरीफ लड़का हूँ और मैंने आपको पहली बार नंगा देखा है। अब वो हंसकर बोली कि हाँ-हाँ वो तो दिखाई ही दे रहा है कि तू कितना शरीफ लड़का है? जो जवान लड़कियों को नंगा देखता फिरता है। फिर मैंने भी झट से कहा कि जीजी उस दिन आप पैरों के बीच में बालों को बार-बार क्यों रगड़ रही थी? तो इस पर वो शरमा गयी और बोली कि धत क्या कभी किसी जवान लड़की से ऐसी बात पूछी जाती है? अब मैंने पूछा कि फिर किससे पूछी जाती है? तब उसने इतना ही कहा कि मुझे नहीं पता।

अब में तुरंत समझ गया था कि वो उस दिन देखने से ज़्यादा नाराज नहीं थी और उस समय तक मेरा डर बहुत हद तक कम हो गया था और अब मेरा लंड खड़ा होना शुरू हो गया था। फिर मेरे मन में एक मस्ती शरारत सूझी और मैंने दोबारा से दीपाली से पूछा कि जीजी बताओ ना कि तुम उस दिन क्या कर रही थी? यह बात सुनकर वो पहले तो मुस्कुराती रही और फिर एकदम से बोली क्या तू मुझे फिर से नंगा देखना चाहेगा? अब मेरा दिल बहुत ज़ोर से धड़कने लगा था और फिर मैंने हल्के से कहा कि हाँ जीजी, में फिर से आपको नंगा देखना चाहता हूँ। अब वो बोली क्या कभी तुने पहले भी यह काम किया है? तब मैंने कहा कि नहीं। फिर उसने मुस्कुराते हुए कहा कि आ मेरे पास आज में तुझे सब कुछ सीखा दूंगी और यह कहकर उसने मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया और वो मेरे होंठो को चूमने लगी। अब मैंने भी उसको कसकर पकड़ लिया और में उसके होंठो को चूमने लगा था। अब उसकी जीभ मेरे मुँह में घुसने की कोशिश कर रही थी और मैंने अपना मुँह खोलकर उसकी जीभ को चूसना शुरू कर दिया। अब इधर मेरा लंड भी चोट खाए जले नाग की तरह फनफना रहा था और मेरी पेंट से बाहर आने के लिए मचल रहा था। फिर मैंने अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर दीपाली के तने हुए बूब्स पर रख दिया और में बड़ी बेताबी के साथ मसलने लगा था।

अब दीपाली का पूरा शरीर एक भट्टी की तरह तप रहा था और अब हमारी गरम साँसे एक दूसरे की सांसो से टकरा रही थी। अब मुझे ऐसा लग रहा था कि में मस्ती मज़े की वजह से बादलो में उड़े जा रहा हूँ। अब मुझसे सब्र नहीं हो रहा, मैंने उसके बूब्स को मसलते हुए अपना दूसरा हाथ उसके कूल्हों पर रख दिया और उनको बहुत बुरी तरह से मसलने लगा था। तभी दीपाली के मुँह से हल्की सी करहाने की आवाज निकली ओह्ह्ह आईई और फिर वो बोली कि जरा आराम से मसलो, में कहीं भागी नहीं जा रही हूँ, तेज़ी के साथ मसलने पर मुझे दर्द होता है, लेकिन में अपनी धुन में ही उसके कुल्हे मसलता जा रहा था और वो ओह्ह्ह्ह ऊऊईईईई करती रही। अब उसकी यह आवाज़े सुनकर मेरा लंड बेताब हो रहा था और मेरी पेंट के अंदर से ही उसकी नाभि के आसपास टक्कर मार रहा था। फिर मैंने उसके कान में फुसफसाते हुए कहा कि अपनी सलवार कमीज को उतार दो, तब पहले तो वो मना करने लगी, लेकिन फिर जब मैंने उसकी कमीज ऊपर की तरफ उठानी शुरू कि तब उसने कहा कि रूको बाबा तुम तो मेरे बटन ही तोड़ दोगे, में ही इसको उतार देती हूँ। अब यह बात कहकर उसने अपनी कमीज के बटन खोलकर अपनी कमीज को उतार दिया, जिसके बाद वो सिर्फ सफ़ेद रंग की ब्रा और सलवार में खड़ी थी।

अब में उसको घूरकर देखता ही रह गया, उसकी बगल में एक भी बाल नहीं था शायद उसने रविवार को ही बगल के भी बाल साफ किए थे। फिर मैंने अपना एक हाथ उठाकर और उसके एक बूब्स पर रख दिया और अब उसकी ब्रा के ऊपर से बूब्स को दबाने लगा था और अपने दूसरे हाथ को उसकी गांड पर फैर रहा था। अब दीपाली का चेहरा लाल सुर्ख हो गया था और उसके मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी वो आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह ऑश कर रही थी। दोस्तों इस समय मेरे दोनों हाथ उसके बूब्स और गांड को मसलने में बहुत व्यस्त थे और मेरे होंठ उसके होंठो को चूस रहे थे। फिर मैंने उसको पलंग पर लेटा दिया और फिर में उसके उसके ऊपर चढ़ गया और उसकी कमर के नीचे अपना हाथ ले जाकर मैंने उसके सर को ऊपर उठाया और में उसके होंठो को चूसने लगा था। अब में इतना जोश में था कि कई बार उसने कहा कि जरा धीरे चूसो, मेरा दम घुट रहा है, कई बार तो एक दूसरे के होंठ चूसते हुए हम दोनों के मुँह से गूऊ न गू की आवाज निकल रही थी। अब में पीछे से उसकी ब्रा का हुक खोलने लगा था और फिर थोड़ी सी मेहनत के बाद मैंने उसको भी खोल दिया और उसकी ब्रा के हुक खुलते ही उसके बूब्स एकदम से ऊपर की तरफ उछले मानो उनको जबरदस्ती दबाकर क़ैद किया गया था।

अब उनको आज़ादी मिल गयी हो, उसके बूब्स बहुत ही गोरे और एकदम सख़्त और निप्पल तने हुए थे और वो दोनों निप्पल बाहर की तरफ उठे हुए और एकदम तने हुए थे। फिर जैसे ही मैंने अपने एक हाथ से उसके बूब्स को मसलना शुरू किया और उसके दूसरे निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा। अब यह सब होने की वजह से दीपाली की हालत खराब हो गयी और अब वो ज़ोर-जोर से कसमसाने लगी थी। अब उसके मुँह से सस्स ऊऊईईईई आहह्ह्ह ओह्ह्ह्हह में मरी माँ आह्ह्ह्ह मर गयी रे जैसी आवाजे निकलने लगी थी। फिर इधर मेरा लंड अभी तक मेरी पेंट में ही क़ैद था और उछलकूद कर रहा था और उसकी सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत पर टक्कर मार रहा था। फिर मैंने अपने मुँह से उसके निप्पल को चूसते हुए और अपने एक हाथ से उसके बूब्स को मसलते हुए अपने दूसरे हाथ से उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया। तभी उसने भी कोई देर नहीं कि और अपनी गांड को ऊपर करके मुझे अपनी सलवार उतारने में मदद करने लगी थी। अब वो मेरे सामने सिर्फ पेंटी में ही थी और उसने सफ़ेद रंग की पेंटी पहनी थी, जो उसकी चूत के ऊपर से गीली हो चुकी थी। दोस्तों देखकर ऐसा लगता था कि उसकी चूत ने उत्तेजना की वजह से पानी छोड़ना शुरू कर दिया था।

फिर जैसे ही मैंने उसकी चूत को उसकी पेंटी के ऊपर से सहलाना शुरू किया, तब वो काँपने सी लगी और मस्ती में आकर बोली कि मुझे तो तूने नंगी कर दिया है और मेरा सब कुछ देख लिया है, लेकिन तुम अपना लंड अभी तक अपनी पेंट में छुपाए हुए हो और फिर यह कहकर उसने मेरी पेंट की चैन को खोल दिया। दोस्तों में हमेशा पेंट के नीचे अंडरवियर नहीं पहनता हूँ और इसलिए मेरा लंड पेंट के उतरते ही एकदम से फनफनाता हुआ बाहर निकल आया था। अब मेरा लंड देखते ही दीपाली एकदम मस्त हो गयी और वो चकित होकर अपने मुहं पर एक हाथ रखकर बोली कि हाए राम तुम्हारा लंड तो बहुत लम्बा और मोटा भी है, यह तो करीब सात इंच लम्बा होगा और तीन इंच मोटा भी होगा। फिर वो खुश होकर कहने लगी वाह तुम्हारे साथ तो मुझे बहुत मज़ा आएगा, में तो तुम्हे अभी तक बच्चा ही समझती थी, लेकिन तुम तो एकदम जवान हो, एक सुंदर लंड के मालिक हो और बहुत अच्छी तरह से चोदने की ताकत रखते हो। अब उसने मेरे सारे कपड़े एक-एक करके उताए दिए थे और मेरे तने हुए लंड को सहलाने लगी थी, मेरे लंड का टोपा एकदम लाल हो चुका था और बहुत गरम भी था। फिर मैंने भी उसकी चूत से उसकी पेंटी को उतार दिया और देखा तो आज उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था और वो एकदम साफ चिकनी चूत थी।

अब मैंने कहा कि जीजी उस दिन तो तुम्हारी चूत पर बहुत झाटे थी और आज एकदम साफ है यह आज किसी हीरे की तरह चमक रही है। तभी वो हंस पड़ी और बोली कि में तुम्हारी तरह नहीं हूँ जो अपनी झाटे और बगल का जंगल साफ ना करे, यह मुझको अच्छा नहीं लगता और तुम भी यह सब साफ किया करो, नहीं तो बीमारी हो जाएँगी। अब मैंने कहा कि जीजी मैंने तो आज तक अपनी झाटे और बगल के बाल साफ ही नहीं किए और मुझे ऐसा करने में बड़ा डर लगता है कि कहीं ब्लेड से कट ना जाए। फिर वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर खिलखिला पड़ी और फिर बोली कि अगर ऐसी बात है तो तुम्हारी बगल के बाल और लंड से झाटे में शेव कर दूँगी और हाँ एक बात और है कि अब तू मुझे बार-बार जीजी ना कहा कर। अब में तेरी जीजी नहीं रही हूँ, में बस आज से तेरी माशूका हो गयी हूँ और इसलिए अब तू मुझको प्रिया कहा कर। फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है और यह कहकर मैंने अपनी एक उंगली को उसकी चूत के छेद में डाल दिया, उसकी चूत का छेद बहुत गीला था और एकदम चिकना हो था, उसकी चूत एकदम भट्टी की तरह तप रही थी। अब उसकी चूत से पानी भी निकलने की वजह से बहुत चिकनाहट भी थी।

फिर मैंने उसकी चूत में अपनी उंगली को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और कभी-कभी में अपनी उंगलियों के बीच में उसके दाने को भी मसल देता। अब उसके मुँह से सिसकियों की आवाज निकल रही थी, वो आहह्ह्ह्ह आईईईईई ऊफफ्फ कर रही थी और कह रही थी कि जरा ज़ोर से अपनी उंगली को अंदर बाहर करो और अब में ज्यादा तेज़ी के साथ ऊँगली को आगे पीछे करने लगा था। अब उसके मुँह से सिसकियों की आवाज बढ़ती ही जा रही थी और अब वो लगातार उफफफ्फ ओह हाए में मर गयी कर रही थी। तभी वो अपनी कमर को तेज़ी के साथ हिलाने लगी और अटक अटककर बोली कि हाँ आह्ह्ह और तेजी से अंदर बाहर करो ऊईईईईई मेरा अब निकला आाह्ह्ह कहकर वो एकदम शांत सी हो गयी। अब मैंने देखा कि उसकी चूत से पानी निकल रहा था जिसकी वजह से वो पूरी चादर गीली हो चुकी थी, मैंने कहा कि जीजी आपका तो निकल गया। फिर वो बोली कि हाँ में झड़ गयी हूँ और फिर थोड़ा दिखावटी गुस्से से वो बोली कि मैंने अभी क्या कहा था भूल गया? कि तू मुझको अब जीजी नहीं बल्कि प्रिया कहकर बुलाया कर, लेकिन तू फिर भी जीजी ही कहे जा रहा है। फिर मैंने कहा कि माफ करना जीजी उफ्फ्फ नहीं प्रिया, कुछ देर तक हम ऐसे ही मज़ा लूटते रहे और अब इस बीच वो एक बार और झड़ चुकी थी।

अब वो अभी तक मेरा लंड सहला रही थी, इसलिए मेरा बर्दाश्त से बाहर हो रहा था। फिर वो भी मुझसे कहने लगी थी कि विक्की तुम मुझे अब और मत तड़पाओ और अपना लंड मेरी चूत में डाल भी दो। फिर यह बात सुनकर में उसके पैरों के बीच में आ गया और मैंने उसकी गांड के नीचे एक तकिया रख दिया, जिसकी वजह से उसकी चूत ऊपर की तरफ उठ चुकी थी। फिर मैंने उसके दोनों पैरों को चौड़ा करके घुटनो से मोड़कर ऊपर की तरफ उठा दिया और अपने लंड का टोपा उसकी चूत के छेद पर रखा। अब मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे कि मैंने अपना लंड किसी भट्टी पर रख दिया है, उसकी चूत इतनी गरम थी और भट्टी की तरह तप रही थी। तभी मैंने अपनी कमर को उठाकर एक धक्का मार दिया जिसकी वजह से मेरे लंड का टोपा उसकी चूत में घुस गया और फिर इसके बाद मैंने एक बहुत ज़ोरदार धक्का लगाया, जिसकी वजह से मेरा लंड 5-6 इंच तक उसकी चूत में चला गया। अब उस दर्द की वजह से उसके मुँह से एक ज़ोर की सिसकी निकली और फिर वो बोली कि तू तो बड़ा बेदर्दी है, जो एक ही धक्के में अपने लंड को मेरी चूत में पूरा अंदर तक डालना चाहता है, अरे तेरा क्या मेरी चूत को फाड़ने का इरादा है? थोड़ा आराम से कर तेरा लंड बड़ा है ना इसलिए मुझे बहुत दर्द होता है, लेकिन मैंने उसकी एक भी नहीं सुनी।

फिर मैंने मौका देखकर एक और धक्का तेज़ी के साथ लगा दिया और अब मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया। अब वो हल्की सी आवाज के साथ चिल्लाई ऊऊईईईई ऊफ्फ्फ माँ में मर गई ऊऊहह मेरी माँ कोई बचाओ मुझे आह्ह्ह्ह मेरी आईईईईईईई चूत को फाड़ दिया और फिर में एकदम से थोड़ा सा दूर हो गया ताकि कुछ गड़बड़ ना हो जाए। अब में उसको पूछने लगा क्या तुम्हे ज़्यादा दर्द हो रहा हो? अगर ऐसा है तो में बाहर निकाल लूँ। फिर वो बोली कि अरे नहीं ज़्यादा तो नहीं, लेकिन तुने वो एकदम से अंदर कर दिया है इसलिए मुझे थोड़ा सा दर्द हो रहा है, क्योंकि तेरा लंड बहुत लम्बा और मोटा है ना इसलिए। अब तू मेरे ऊपर लेट जा और कुछ देर मेरे बूब्स को चूस ले। फिर मैंने वैसा ही किया और में उसके बूब्स को अपने मुहं में भरकर चूसने और मसलने लगा था, कुछ देर में ही उसको मज़ा आने लगा था और अब वो अपनी गांड को हिला हिलाकर ऊपर की तरफ उठाने लगी थी और बोली कि अब धक्के लगा। फिर उसी समय मैंने अपनी कमर और कुल्हे उठा उठाकर ज़ोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए, थोड़ी ही देर में उसके मुँह से अजीब-अजीब सी जोश भरी आवाज़े निकलने लगी।

अब वो बोल रही थी आह्ह्ह्ह चोद मुझे जोर-जोर से चोद, फाड़ दे तू आज मेरी चूत को उफफफ्फ मेरा फिर से निकलने वाला आह्ह्ह्हह और जोर से, यह कहकर वो बड़ी तेज़ी से अपनी कमर को हिलाने लगी थी और सस्स्स ऊईईईई करती हुई झड़ गयी। अब मेरा लंड एकदम गीला हो गया था और बहुत चिकना हो गया था जिसकी वजह से वो बड़े आराम से फिसलता हुआ बाहर भी निकल रहा था। फिर मैंने धक्के लगाने की गति को पहले से तेज कर दिया था। तभी मुझे थोड़ी सी मस्ती सूझी और फिर मैंने धक्के लगाते-लगाते अपनी एक उंगली पर उसका पानी लगाया और अचानक से उसकी गांड के छेद पर फैरते हुए मैंने अपनी उस उंगली को उसकी गांड के अंदर कर दिया। अब वो एकदम से दर्द से चीख उठी और बोली कि क्या शैतानी कर रहा है? अरे ऐसा ना कर मुझे दर्द होता है, तू अब तुरंत मेरी गांड से अपनी उंगली को बाहर निकाल। अब मैंने उसको पूछा क्या कभी तुमने किसी से गांड मरवाई है? क्योंकि में आज तुम्हारी गांड भी मारना चाहता हूँ। फिर इस बात पर दीपाली ने कहा कि नहीं मैंने अपनी गांड कभी नहीं मरवाई है और ना ही मुझसे मरवाएगी, क्योंकि वो गांड मारने को सही नहीं मानती है।

फिर उसने पलटकर पूछा क्या तुमने किसी से अपनी गांड मरवाई है या किसी की गांड मारी है? तब मैंने नहीं में जवाब दिया। फिर इस पर उसने कहा कि विक्की तू तो बहुत ही सुंदर और अच्छा लड़का है, तुझे कैसे छोड़ दिया? क्योंकि लड़के आपस में एक दूसरे की गांड ही मारकर काम चलाते है। अब मैंने कहा कि में सेक्सी जरूर हूँ, लेकिन में ना तो किसी लड़के की गांड मारता हूँ और ना ही मरवाता हूँ, में तो बस चूत ही चोदना चाहता हूँ, हाँ आज तुम्हारी गांड पर मेरा  दिल आ गया है और इसलिए में इसको भी मारना चाहता हूँ। फिर दीपाली बोली कि अभी तक तो उसने गांड कभी नहीं मरवाई और यदि कभी मरवाने की इच्छा हुई तो वो मुझसे ही मरवाएगी। अब हम बातें कर ही रहे थे कि वो फिर से अजीब-अजीब सी बातें करने लगी आह्ह्ह्ह और जोर से मार निकाल दे मेरा सस्स्स्स्सस्स पूरा पानी आज बना दे मेरी चूत की चटनी ऊऊईईईईई उफफफ्फ आहह। फिर वो ऐसे ही करती रही और इधर मेरे भी धक्कों की रफ़्तार बढ़ती ही जा रही थी और अब में पसीने-पसीने हो गया था। अब मेरे मुँह से भी अजीब-अजीब सी बातें निकलने लगी थी आहह्ह्ह हाँ क्यों नहीं? आईईई में आज ही तुम्हारी चूत को चोद चोदकर इसका भोसड़ा बना देता हूँ ऊऊईईईईईई।

अब मेरा आने लगा है आईईईईईईई मुझे ऐसा लगता है कि अब मेरा निकलने वाला है उफफफफफ्फ और ऊऊऊह्ह्ह्ह कहते हुए फुल गति से धक्के मार रहा था कि तभी मुझे ऐसा लगा कि मेरे लंड से कुछ बाहर आ रहा है और फिर मैंने हांफते हुए उसको कसकर पकड़ लिया और ज़ोर-ज़ोर से उसके बूब्स को चूसने लगा था। अब उधर दीपाली भी वो जोश भरी आवाज़े निकाल रही थी ऊईईईईईईईई में आईईईईई फिर से झड़ रही हूँ ऊह्ह्ह्ह मेरी माँ, आह्ह्ह्हह मेरा अब निकल रहा है और यह कहते हुए उसका सारा शरीर एक बार फिर से अकड़ गया और अब वो भी मेरे साथ-साथ झड़ गयी थी। अब उसने झड़ते हुए अपने दाँत मेरे कंधे पर गढ़ा दिए थे, तब दर्द की वजह से मेरे मुँह से एक चीख निकल गयी और तब वो ज़ोर से हंस पड़ी। फिर में बहुत देर तक ऐसे ही उसके ऊपर पड़ा रहा। फिर हम दोनों उठकर बाथरूम में चले गये, तब उसने मुझे बाहर जाने के लिए कहा, लेकिन मैंने मना कर दिया और उसको कहा कि प्रिया में तो यहीं पर रहूँगा और तुमको पेशाब करते हुए देखूँगा। फिर पहले तो वो मना करती रही, लेकिन फिर कुछ देर के बाद वो मान गयी और मेरे सामने बैठकर पेशाब करने लगी थी। अब में यह तो नहीं जान सका था कि उसका पेशाब चूत में कहाँ से निकल रहा है? लेकिन उसको पेशाब करते हुए देखकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

दोस्तों उसके पेशाब की धार उसकी चूत से बहुत मोटी होकर दबाव के साथ तेज गति से बाहर आ रही थी और ऊपर की तरफ उठती हुई बहुत दूर पड़ रही थी और अब दीपाली मेरी तरफ देखकर शर्मीली हँसी हंस रही थी। फिर मैंने भी पेशाब किया, तब उसने भी मुझे बड़े गौर से देखा, मेरी भी धार बहुत मोटी थी और बहुत दूर तक जा रही थी। अब इसी बीच हम दोनों दुबारा से बहुत उत्तेजित होने शुरू हो गये और फिर हम लोगों ने एक बार फिर से चुदाई के मज़े लिए। फिर हम दोनों बहुत देर तक ऐसे ही चिपके हुए नंगे पड़े रहे और बात करते रहे। अब मेरा मन तो उसको एक बार फिर से चोदने को कर रहा था, लेकिन दीपाली ने ही मना कर दिया और कहा कि ज़्यादा चुदाई नहीं करनी चाहिए वरना कमज़ोरी आ जाएगी। अब मैंने भी उसकी वो बात मान ली और हम दोनों अपने कपड़े पहनकर तैयार हो गये और फिर दूसरे मौके की तलाश में रहने लगे।

दोस्तों यह था मेरा चुदाई की पहला तज़ुर्बा, मुझे उम्मीद है कि आप सभी ने बड़े ध्यान से मेरी इस कहानी को पढ़ा होगा और इसलिए अब में अपनी अगली सच्ची घटना को भी बहुत जल्दी लेकर आने वाला हूँ, बस आप थोड़ा सा इंतजार करें ।।

धन्यवाद …


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